सीपिया वरन,मंगलमय तन,
जीवन-दर्शन वांचते नयन...... वरदानों से उजले-उजले, कर्पूरी वांहों के घेरे, इंगुरी हंथेली पर जैसे, लिक्खे हों भाग्यलेख मेरे, कुछ पल ठहरो तो पूजा में बिखरा दूं अंजुरे भरे सुमन। सीपिया वरन,मंगलमय तन.....श्री भारत भूषन।सीपिया वरन,मंगलमय तन,
जीवन-दर्शन वांचते नयन...... वरदानों से उजले-उजले, कर्पूरी वांहों के घेरे, इंगुरी हंथेली पर जैसे, लिक्खे हों भाग्यलेख मेरे, कुछ पल ठहरो तो पूजा में बिखरा दूं अंजुरे भरे सुमन। सीपिया वरन,मंगलमय तन.....श्री भारत भूषन।
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