भारतीय राजनीति स्वयं अन्याय और अनाचारियों से भरी पड़ी है।कुछ गुन्डों ने स्वयं को वचाने के लिये खुद नेता वन जाने का आसान तरीका अपना कर सारी भारतीय आदर्शबादियों के मुंह पर थूक दिया और समस्त कर्म-सिद्धान्त की तौहीन कर दी।यह काम कांग्रेस के साठ साला शासन में खूब फला फूला और योगी जी के -गुन्डा ध्वंसीकरण के चार साला अभियान के सुपरिणाम,उपस्थित परिस्थितियों में,बहुत सीमित हैं।मैने स्वयं माताओं को-हम तो अपने बेटे को गुण्डा वनायें गे-कहते सुना,जैसे यह भी कैरियर चुनाव का विकल्प हो।क्या यह स्थिति किसी समाज की निम्नतम स्थिति तक गिर जाने का प्रतीक नहीं।क्या नकारात्मक समाज की यह स्वीकृति नहीं।
योगी जी का यूपी -अभियान राष्ट्रीय स्तर पर अपनाये जाने की सर्वोपरि आवश्यकता है।(यद्दपि यह प्रविधि सिर्फ गंदी देह को सुंदर कपड़ों से सजाने के प्रयत्न के वरावर है,फिर भी आवश्यक है।)
भारत विभिन्न धर्मों की प्रयोगशाला है,इसका कारण यहां पनपी सर्व-कल्याणकारी सनातन-धर्मी संस्कृति है जिसमें कोई सामूहिक धर्म-शत्रु नहीं है।इस संस्कृति के कारण यहां निर्बाध वैचारिक स्वतंत्रता और दूसरी मज़हबी असहिष्णुता का भी समावेश जारी रहा,पिछले बारह सौ सालों से।परंतु जिस तरह किसी स्वस्थ -उसी लकड़ी को कोई आग जलाकर राख कर देती है ,जिस पर उसका वजूद कायम है,उसी तरह जिन सेमेटिक धर्मों को भारत की सनातन -संस्कृति ने पनपने का वातावरण प्रदान किया,इन सेमेटिकों नें उसी संस्कृति को खत्म करने की हिंसात्मक कोशिश की ,जिसमें बे सफल भी रहे और जो आज भी जारी है।
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