संकल्प को सफलता की अद्भुत परिणति तक ले जाना,योजना को योग्यता के सहयोग से युगान्तकारी योग के युग- परिवर्तन का माध्यम वनाना,साहस को साहसिकता की कल्पांत संभावना वनाना,दुनियां को उसकी दुबिधा से निकाल कर भारत-सापेक्षता प्रदान करना,संपूर्ण विश्व में व्याप्त भारत-वंशियों को भारत की भाव-भूमि से जोड़कर अभूतपूर्व एकता,सौहार्द,सौंदर्य का सृजन करना,आहत,कायर,निराश,भग्न-भारत को उसकी संपूर्ण शक्तियों से परिचित कराना........क्या कोई मोदी जी की इन आकाशीय उपलव्धियों को भुला पाये गा।ऐ भारत ॥ सावधान-पीछे मत मुड़ना,क्यों कि वहां बह खांईं है कि वस आत्महत्या ही विकल्प होगा।
भारत विभिन्न धर्मों की प्रयोगशाला है,इसका कारण यहां पनपी सर्व-कल्याणकारी सनातन-धर्मी संस्कृति है जिसमें कोई सामूहिक धर्म-शत्रु नहीं है।इस संस्कृति के कारण यहां निर्बाध वैचारिक स्वतंत्रता और दूसरी मज़हबी असहिष्णुता का भी समावेश जारी रहा,पिछले बारह सौ सालों से।परंतु जिस तरह किसी स्वस्थ -उसी लकड़ी को कोई आग जलाकर राख कर देती है ,जिस पर उसका वजूद कायम है,उसी तरह जिन सेमेटिक धर्मों को भारत की सनातन -संस्कृति ने पनपने का वातावरण प्रदान किया,इन सेमेटिकों नें उसी संस्कृति को खत्म करने की हिंसात्मक कोशिश की ,जिसमें बे सफल भी रहे और जो आज भी जारी है।
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