फ्रांस-द ग्रेट नेपोलियन बाला,फ्रेंच रेवोल्यूशन बाला,दो विश्व युद्धों में प्रत्यक्ष जूझने बाला,ओलिवर-विल्बर बन्धुओं के पहले एयर प्लेन बाला......।नेपोलियन ने जब बहुत सीमित सेना लेकर इजिप्ट की मुस्लिम दर्प से लदी विशाल सेना को वस कुछ ही देर में परास्त कर दिया......इजिप्ट ने महसूस किया....बे व्यर्थ ही खुद को इस्लामी दर्प के झूठे कोहरे में उलझे थे।कैरो यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने लिखा-अव हम फ्रेन्च आर्मी की संगठित सेना,उनकी जीवन -शैली ही नहीं उनके कैवरे न्ृत्य भी पसंद करने लगे थे।.....क्या तब से जमाना और बड़े अंतर पर नहीं आ गया है।क्या टर्की एण्ड कम्पनी आत्म-हत्या की ओर नहीं बढ़ रहे।भारत में भी देश-घातक तवका जो अवतक मुखौटे ओढ़े था उघड़ गया है और उसके राक्षसी दांत दिख गये हैं।अतः ऐ भारत सावधान-यू आर ऐट सीरियस रिस्क।
भारत विभिन्न धर्मों की प्रयोगशाला है,इसका कारण यहां पनपी सर्व-कल्याणकारी सनातन-धर्मी संस्कृति है जिसमें कोई सामूहिक धर्म-शत्रु नहीं है।इस संस्कृति के कारण यहां निर्बाध वैचारिक स्वतंत्रता और दूसरी मज़हबी असहिष्णुता का भी समावेश जारी रहा,पिछले बारह सौ सालों से।परंतु जिस तरह किसी स्वस्थ -उसी लकड़ी को कोई आग जलाकर राख कर देती है ,जिस पर उसका वजूद कायम है,उसी तरह जिन सेमेटिक धर्मों को भारत की सनातन -संस्कृति ने पनपने का वातावरण प्रदान किया,इन सेमेटिकों नें उसी संस्कृति को खत्म करने की हिंसात्मक कोशिश की ,जिसमें बे सफल भी रहे और जो आज भी जारी है।
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