अरनव एक बार फिर-स्टेट गवर्नमेंट,महाराष्ट्र।एक संवैधानिक संस्था ।पत्रकार-एक स्तंभ जिसे प्रजातंत्र को उतनी ही जरूरत है जितनी स्टेट सरकार की।और जुडीशियरी..........भी।जब कोई सरकार प्रेस पर आक्रमण करती हैै तो जुडीशियरी को वहुत लापरबाही या ॓सुरक्षित॔ रहने ,करने की चक्करबाजी से मुक्त होना चाहिये।तुम नहीं सही,मौका आने पर कोई पागल भेंड़िया जुडीशियरी को,अरनवाइज़ कर देगा किसी दिन।तुम खुद ही तब कर लेना -सुरक्षित -रखने का यह खिलबाड़,अगर इस लायक छोड़े जाओ।
भारत विभिन्न धर्मों की प्रयोगशाला है,इसका कारण यहां पनपी सर्व-कल्याणकारी सनातन-धर्मी संस्कृति है जिसमें कोई सामूहिक धर्म-शत्रु नहीं है।इस संस्कृति के कारण यहां निर्बाध वैचारिक स्वतंत्रता और दूसरी मज़हबी असहिष्णुता का भी समावेश जारी रहा,पिछले बारह सौ सालों से।परंतु जिस तरह किसी स्वस्थ -उसी लकड़ी को कोई आग जलाकर राख कर देती है ,जिस पर उसका वजूद कायम है,उसी तरह जिन सेमेटिक धर्मों को भारत की सनातन -संस्कृति ने पनपने का वातावरण प्रदान किया,इन सेमेटिकों नें उसी संस्कृति को खत्म करने की हिंसात्मक कोशिश की ,जिसमें बे सफल भी रहे और जो आज भी जारी है।
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