अरनव एक बार फिर-स्टेट गवर्नमेंट,महाराष्ट्र।एक संवैधानिक संस्था ।पत्रकार-एक स्तंभ जिसे प्रजातंत्र को उतनी ही जरूरत है जितनी स्टेट सरकार की।और जुडीशियरी..........भी।जब कोई सरकार प्रेस पर आक्रमण करती हैै तो जुडीशियरी को वहुत लापरबाही या ॓सुरक्षित॔ रहने ,करने की चक्करबाजी से मुक्त होना चाहिये।तुम नहीं सही,मौका आने पर कोई पागल भेंड़िया जुडीशियरी को,अरनवाइज़ कर देगा किसी दिन।तुम खुद ही तब कर लेना -सुरक्षित -रखने का यह खिलबाड़,अगर इस लायक छोड़े जाओ।
बिहार-तुम्हें क्या हो गया है।क्या तुम चन्द्रगुप्त मौर्य बाले ही हो.....उज्जैनी-अवन्तिका ने अपने को फिर भी चन्द्रगुप्त विकृमादित्य और कालिदास के अनुरूप कुछ वचा लिया पर बिहार तुम.......एक सजायाफ्ता भ्रष्टाचारी के नवीं फेल बेटे को.......थू।तुमने कुछ नहीं सोंचा,पर तुमने चलो कुछ शर्म की और उनको फिर लाये जो तुम्हे खुशहाली में लाने की कुछ तो कोशिशें करें गें।तुम्हारा वहुत उपकार।मेरा कुछ भी रिस्क पर नहीं फिर भी कल पूरे दिन पता नहीं क्यों मेरा मत्था गरम रहा।
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