आज दुनियां के देशों में संवंधों को लेकर अभूतपूर्व संकट है।कोरोना से त्रस्त देश,चीन की ओर आंखें तरेर रहे हैं।चीन पागल कुत्ते की तरह कभी इस पर कभी उस पर भौंक रहा है।फ्रांस ने असहिष्णु,जहरीली फुफकारों से लैस मुस्लिम आक्रमकता एवं हिंसा को ललकार दिया है,जिससे दुनियां ,1911-13 शताव्दियों के क्रूसेडी समय में पहुंच गया है।पाकिस्तान ,आधुनिकता और इस्लामिक जेहाद के बीच में खड़ा हांफ रहा है।कुल मिलाकर तीसरे वर्ल्ड वार की संभावनाओं के निकट पहुंची दुनियां निश्चित ही पहले मुस्लिम वैचारिक अधिष्ठान के मानवता रहित पक्ष से दो दो हाथ करने के अधिक निकट है।भविष्य की संभावनाओं को सकारात्मक वनाने में,इस तरह,संपूर्ण विवेकबान तबके को जागरूक रहना है,नहीं तो विनाश संभव है।
भारत विभिन्न धर्मों की प्रयोगशाला है,इसका कारण यहां पनपी सर्व-कल्याणकारी सनातन-धर्मी संस्कृति है जिसमें कोई सामूहिक धर्म-शत्रु नहीं है।इस संस्कृति के कारण यहां निर्बाध वैचारिक स्वतंत्रता और दूसरी मज़हबी असहिष्णुता का भी समावेश जारी रहा,पिछले बारह सौ सालों से।परंतु जिस तरह किसी स्वस्थ -उसी लकड़ी को कोई आग जलाकर राख कर देती है ,जिस पर उसका वजूद कायम है,उसी तरह जिन सेमेटिक धर्मों को भारत की सनातन -संस्कृति ने पनपने का वातावरण प्रदान किया,इन सेमेटिकों नें उसी संस्कृति को खत्म करने की हिंसात्मक कोशिश की ,जिसमें बे सफल भी रहे और जो आज भी जारी है।
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