भारत विभिन्न धर्मों की प्रयोगशाला है,इसका कारण यहां पनपी सर्व-कल्याणकारी सनातन-धर्मी संस्कृति है जिसमें कोई सामूहिक धर्म-शत्रु नहीं है।इस संस्कृति के कारण यहां निर्बाध वैचारिक स्वतंत्रता और दूसरी मज़हबी असहिष्णुता का भी समावेश जारी रहा,पिछले बारह सौ सालों से।परंतु जिस तरह किसी स्वस्थ -उसी लकड़ी को कोई आग जलाकर राख कर देती है ,जिस पर उसका वजूद कायम है,उसी तरह जिन सेमेटिक धर्मों को भारत की सनातन -संस्कृति ने पनपने का वातावरण प्रदान किया,इन सेमेटिकों नें उसी संस्कृति को खत्म करने की हिंसात्मक कोशिश की ,जिसमें बे सफल भी रहे और जो आज भी जारी है।
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यह किसान जिस धमकी शैली में आंदोलन चला रहे हैं,इन्हे यह खुशफहमी है कि यह नेता जो खुद दोगले और झूंठे हैं,इनको ,अपने आकाओं के लिये कुछ दिलवा पायें गें।यह पूरी तरह निराधार है।कोई भी सरकार किसी भी कीमत पर बिरोधियों का एजेंड़ा सफल नहीं होने देगी,और जब सामान्य जन इस सारी हलचल के खिलाफ हो। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि बीजेपी सरकार के प्रस्तावित हर कानून का बिपक्ष बिरोध कर रहा है,ऐसी स्थिति में सरकार तो और भी इन कानूनों को वापस नहीं लेगी।कुछ राजनीतिक पार्टियों के मुखौटे वदलनें में सहायक होने के अतिरिक्त इस पूरे हंगामें का कोई लाभ नहीं होगा।
बिहार-तुम्हें क्या हो गया है।क्या तुम चन्द्रगुप्त मौर्य बाले ही हो.....उज्जैनी-अवन्तिका ने अपने को फिर भी चन्द्रगुप्त विकृमादित्य और कालिदास के अनुरूप कुछ वचा लिया पर बिहार तुम.......एक सजायाफ्ता भ्रष्टाचारी के नवीं फेल बेटे को.......थू।तुमने कुछ नहीं सोंचा,पर तुमने चलो कुछ शर्म की और उनको फिर लाये जो तुम्हे खुशहाली में लाने की कुछ तो कोशिशें करें गें।तुम्हारा वहुत उपकार।मेरा कुछ भी रिस्क पर नहीं फिर भी कल पूरे दिन पता नहीं क्यों मेरा मत्था गरम रहा।

bahut he sunger geet
जवाब देंहटाएंmishra je ko sarsati je nay sawaym prasad dia
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